यूपी एमएलसी चुनाव: आज थमेगा प्रचार, योगी-अखिलेश की प्रतिष्ठा दांव पर; 11 सीटों के लिए भाजपा-सपा ने झोंकी पूरी ताकत

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की विधान परिषद सीटों के चुनाव के लिए बुधवार, 21 अक्टूबर को प्रचार का आखिरी दिन है। चुनावी मैदान में भाजपा और समाजवादी पार्टी ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है। 23 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि 27 अक्टूबर को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे। विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे इन चुनावों को राजनीतिक दलों के लिए सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है। भले ही मुकाबला 11 सीटों पर है, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा के दिग्गज नेता और सपा के सांसद-विधायक अपने-अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए सक्रिय हैं।

योगी ने संभाली भाजपा की कमान, अखिलेश ने सौंपी नेताओं को जिम्मेदारी

विधान परिषद चुनाव में भाजपा अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने की कोशिश में जुटी है। पिछली बार 11 सीटों में से भाजपा ने पांच और समाजवादी पार्टी ने छह सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार भाजपा का आंकड़ा दोहरे अंक तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद प्रचार की कमान संभाली है।

योगी आदित्यनाथ गोरखपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, आगरा और गाजियाबाद समेत कई जिलों में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में जनसभाएं कर चुके हैं। वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भले ही खुद कोई जनसभा नहीं की, लेकिन पार्टी के सांसदों और विधायकों को अलग-अलग जिलों में चुनावी जिम्मेदारी सौंपी है। जिलाध्यक्षों, महानगर अध्यक्षों और उनकी टीमों को भी प्रचार में लगाया गया है। दोनों दलों के बीच कड़ा मुकाबला होने के आसार हैं।

विधानसभा चुनाव से पहले एमएलसी चुनाव क्यों माना जा रहा अहम?

इन चुनावों को विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के जनाधार और रणनीति की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। इसकी तीन प्रमुख वजहें हैं।

पहली वजह मतदान की प्रक्रिया है। इन चुनावों में ईवीएम के बजाय मतपत्रों का इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसे में भाजपा की जीत होने पर वह विपक्ष के ईवीएम से जुड़े आरोपों को लेकर सपा पर पलटवार कर सकती है। वहीं, सपा की जीत से पार्टी को अपने राजनीतिक दावों के समर्थन में तर्क रखने का अवसर मिल सकता है।

दूसरी वजह मतदाताओं की प्रकृति है। इन चुनावों में स्नातक और शिक्षक वर्ग के मतदाता हिस्सा लेते हैं। पढ़े-लिखे और शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े मतदाताओं का समर्थन हासिल करना राजनीतिक दलों के लिए अहम माना जाता है।

तीसरी वजह चुनाव का भौगोलिक विस्तार है। इन 11 निर्वाचन क्षेत्रों के दायरे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक के सभी 75 जिले शामिल हैं। ऐसे में चुनाव के नतीजों को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक रुझान समझने के संकेतक के तौर पर भी देखा जा रहा है।

एमएलसी चुनाव की 11 सीटों में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की जिन 11 सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी की सीटें हैं। वहीं, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, आगरा, वाराणसी, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद की सीटें शामिल हैं।

लखनऊ और वाराणसी स्नातक सीटों पर इन जिलों में मतदान

लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में नौ जिले शामिल हैं। इनमें लखनऊ, हरदोई, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, सीतापुर, उन्नाव, बाराबंकी, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर आते हैं।

वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में आठ जिले शामिल हैं। इनमें वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही और बलिया के मतदाता मतदान करेंगे।

आगरा और मेरठ स्नातक सीटों का चुनावी दायरा

आगरा खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 12 जिले शामिल हैं। इनमें आगरा, अलीगढ़, एटा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, हाथरस, कासगंज, इटावा, फर्रुखाबाद, कन्नौज और औरैया आते हैं।

मेरठ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में नौ जिले शामिल हैं। इनमें मेरठ, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, हापुड़, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और शामली के मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।

इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट में 10 जिलों के मतदाता करेंगे मतदान

इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 10 जिले शामिल हैं। इनमें प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, झांसी, जालौन और ललितपुर आते हैं। इस निर्वाचन क्षेत्र में शामिल जिलों के स्नातक मतदाता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करेंगे।

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भी कई जिलों के मतदाता शामिल

लखनऊ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में नौ जिले शामिल हैं। इनमें लखनऊ, हरदोई, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, सीतापुर, उन्नाव, बाराबंकी, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर आते हैं।

वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में आठ जिले शामिल हैं। इनमें वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही और बलिया के मतदाता शामिल हैं।

आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 12 जिले आते हैं। इनमें आगरा, अलीगढ़, एटा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, हाथरस, कासगंज, इटावा, फर्रुखाबाद, कन्नौज और औरैया शामिल हैं।

मेरठ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में नौ जिले हैं। इनमें मेरठ, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, हापुड़, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और शामली शामिल हैं।

बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीटों पर भी मुकाबला

बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में नौ जिले शामिल हैं। इनमें बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत, मुरादाबाद, अमरोहा, बिजनौर, रामपुर और संभल आते हैं।

वहीं, गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का दायरा सबसे बड़ा है। इसमें 17 जिले शामिल हैं। इनमें गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर, अयोध्या, अंबेडकर नगर, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, आजमगढ़, मऊ, अमेठी और सुल्तानपुर के कुछ क्षेत्र शामिल हैं।

23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को आएंगे नतीजे

एमएलसी चुनाव के लिए बुधवार शाम प्रचार समाप्त हो जाएगा। इसके बाद 23 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। भाजपा और सपा दोनों के लिए ये चुनाव अहम हैं। एक ओर भाजपा अपनी सीटें बढ़ाकर राजनीतिक बढ़त हासिल करना चाहती है, वहीं सपा पिछली बार के प्रदर्शन को दोहराने या उससे बेहतर नतीजे हासिल करने की कोशिश में है। चुनाव के परिणामों से दोनों दलों की रणनीति और शिक्षक-स्नातक मतदाताओं के रुझान को लेकर राजनीतिक तस्वीर कुछ हद तक स्पष्ट हो सकती है।

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